गुनाह का गीत
अगर मैंने किसी के होठ के पाटल कभी चूमे
अगर मैंने किसी के नैन के बादल कभी चूमे
      महज इससे किसी का प्यार मुझको पाप कैसे हो?
      महज इससे किसी का स्वर्ग मुझ पर शाप कैसे हो?

   तुम्हारा मन अगर सींचूँ
   गुलाबी तन अगर सीचूँ तरल मलयज झकोरों से!
   तुम्हारा चित्र खींचूँ प्यास के रंगीन डोरों से
कली-सा तन, किरन-सा मन, शिथिल सतरंगिया आँचल
उसी में खिल पड़ें यदि भूल से कुछ होठ के पाटल
किसी के होठ पर झुक जायँ कच्चे नैन के बादल
      महज इससे किसी का प्यार मुझ पर पाप कैसे हो?
      महज इससे किसी का स्वर्ग मुझ पर शाप कैसे हो?

किसी की गोद में सिर धर
घटा घनघोर बिखराकर, अगर विश्वास हो जाए
धड़कते वक्ष पर मेरा अगर अस्तित्व खो जाए?
   न हो यह वासना तो ज़िन्दगी की माप कैसे हो?
   किसी के रूप का सम्मान मुझ पर पाप कैसे हो?
   नसों का रेशमी तूफान मुझ पर शाप कैसे हो?

   किसी की साँस मैं चुन दूँ
   किसी के होठ पर बुन दूँ अगर अंगूर की पर्तें
   प्रणय में निभ नहीं पातीं कभी इस तौर की शर्तें
यहाँ तो हर कदम पर स्वर्ग की पगडण्डियाँ घूमीं
अगर मैंने किसी की मदभरी अँगड़ाइयाँ चूमीं
अगर मैंने किसी की साँस की पुरवाइयाँ चूमीं
      महज इससे किसी का प्यार मुझ पर पाप कैसे हो?
      महज इससे किसी का स्वर्ग मुझ पर शाप कैसे हो?
- धर्मवीर भारती
धर्मवीर भारती की काव्य संकलन "ठण्डा लोहा" से ...

***
धर्मवीर भारती
की काव्यालय पर अन्य रचनाएँ

 कनुप्रिया (अंश 1) आम्र-बौर का गीत
 कनुप्रिया (अंश 2) विप्रलब्धा
 कनुप्रिया (अंश 3) उसी आम के नीचे
 कनुप्रिया (अंश 4) समुद्र-स्वप्न
 कनुप्रिया (अंश 5) समापन
 क्योंकि
 गुनाह का गीत
 चाँदनी जगाती है
 शाम: दो मनःस्थितियाँ
इस महीने
'एक फूल की चाह'
सियाराम शरण गुप्त


बेटी, जाता हूँ मन्दिर में
आज्ञा यही समझ तेरी।
उसने नहीं कहा कुछ, मैं ही
बोल उठा तब धीरज धर -
तुझको देवी के प्रसाद का
एक फूल तो दूँ लाकर! ..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने
'कविता उम्मीद से है'
पारुल 'पंखुरी'


क़लम, लिखना चाहती है 'बच्चियां'
कविता खिलखिलाना चाहती है
मासूम चीखों का शोर
मचा देता है उथल पुथल
काँपने लगता है क़लम का तन बदन
कविता रोने लग जाती है ...
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
अगली प्रस्तुति
शुक्रवार 26 अक्टूबर को

सूचना पाने के लिए
ईमेल दर्ज़ करें
संग्रह से कोई भी कविता | काव्य विभाग: शिलाधार युगवाणी नव-कुसुम काव्य-सेतु | प्रतिध्वनि | काव्य लेख
आपकी कविता | सम्पर्क करें | हमारा परिचय

a  MANASKRITI  website