अप्रतिम कविताएँ
रंग

तुम्हारे पास बहुत से रंग हैं
दोस्ती, प्यार, इकरार,
उम्मीदों और खुशियों के।
सपनों का तो रंग-बिरंगा
चंदोवा ही तान दिया है तुमने।
निश्छल मुस्कान का भी तो,
एक और रंग है तुम्हारे पास।
ओ मेरे अनोखे रंगरेज,
रंग दिया है तुमने
मेरी बेनूर दुनिया को
अपने तिलस्मी रंगों के जादू से।

मेरे पास बस एक ही रंग है
समर्पण का।
आओ, रंग दूँ तुम्हें।
मौसम भी है और दस्तूर भी।
इस रंग बदलती दुनिया में
आओ, सुरक्षित रख दें हम,
अपने-अपने रंगों को
एक दूसरे के पास।
ताकि बचे रहें ये रंग
और बची रहे यह कायनात भी,
बदरंग होने से।
- गीता दूबे
काव्यपाठ: पूनम चन्द्रलेखा
विषय:
होली (9)
रंग (3)

काव्यालय को प्राप्त: 26 Mar 2025. काव्यालय पर प्रकाशित: 27 Feb 2026

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