एक बौनी बूँद
एक बौनी बूँद ने
मेहराब से लटक
अपना कद
लंबा करना चाहा

बाकी बूँदें भी
देखा देखी
लंबा होने की
होड़ में
धक्का मुक्की
लगा लटकीं

क्षण भर के लिए
लंबी हुई
फिर गिरीं
और आ मिलीं
अन्य बूँदों में
पानी पानी होती हुई
नादानी पर अपनी।
- दिव्या माथुर
Divya Mathur
email: [email protected]
Divya Mathur
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दिव्या माथुर
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..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
वो खुशी जो कहीं नहीं हासिल।
जो मुअस्सर* नहीं ज़माने में।
ख़्वाबगाहों* से चल के आएगी
ख़ुदबख़ुद तेरे आशियाने में।

~ विनोद तिवारी

*मुअस्सर: प्राप्त करने योग्य; ख्वाबगाहों - सपनों की जगह;

संकलन "समर्पित सत्य समर्पित स्वप्न" में कविताओं के बीच बीच कई मुक्तक भी हैं, जैसे कि यह

तोड़ दो सीमा क्षितिज की,
गगन का विस्तार ले लो


विनोद तिवारी की कविता "प्यार का उपहार" का वीडियो। उपहार उनका और वीडियो द्वारा उपहार का सम्प्रेषण भी वह ही कर रहे हैं। सरल श्रृंगार रस और अभिसार में भीगा, फिर भी प्यार का उपहार ऐसा जो व्यापक होने को प्रेरित करे।

प्यार का उपहार
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