अप्रतिम कविताएँ
'जो हवा में है'
उमाशंकर तिवारी


जो हवा में है, लहर में है
क्यों नहीं वह बात
मुझमें है?

शाम कंधों पर लिए अपने
ज़िन्दगी के रू-ब-रू चलना
रोशनी का हमसफ़र होना
उम्र की कन्दील का जलना
आग जो
जलते सफ़र में ...
...

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
'दिव्य'
गेटे


अनुवाद ~ प्रियदर्शन

नेक बने मनुष्य
उदार और भला;
क्योंकि यही एक चीज़ है
जो उसे अलग करती है
उन सभी जीवित प्राणियों से
जिन्हें हम जानते हैं।

स्वागत है अपनी...

...

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
होलोकॉस्ट में एक कविता
~ प्रियदर्शन

लेकिन इस कंकाल सी लड़की के भीतर एक कविता बची हुई थी-- मनुष्य के विवेक पर आस्था रखने वाली एक कविता। वह देख रही थी कि अमेरिकी सैनिक वहाँ पहुँच रहे हैं। इनमें सबसे आगे कर्ट क्लाइन था। उसने उससे पूछा कि वह जर्मन या अंग्रेजी कुछ बोल सकती है? गर्डा बताती है कि वह 'ज्यू' है। कर्ट क्लाइन बताता है कि वह भी 'ज्यू' है। लेकिन उसे सबसे ज़्यादा यह बात हैरानी में डालती है कि इसके बाद गर्डा जर्मन कवि गेटे (Goethe) की कविता 'डिवाइन' की एक पंक्ति बोलती है...

पूरा काव्य लेख पढ़ने यहाँ क्लिक करें
संग्रह से कोई भी रचना
देखें कौन सी मिलती है!
नई प्रकाशित कवितायें
प्रतिध्वनि में नया ऑडियो
काव्य लेख में नए लेख


इन दर्पणों में देखा तो - अमृत खरे की श्रुतिछंदा की समीक्षा ~ वाणी मुरारका

सारी रचनाएँ काव्यालय के इन विभागों में संयोजित हैं:
शिलाधार - 20वी सदी के पूर्व हिन्दी का शिलाधार काव्य
युगवाणी - 20वी सदी के प्रारम्भ से समकालीन काव्य
नव-कुसुम - उभरते कवियों की रचनाएँ
काव्य-सेतु - अन्य भाषाओं के काव्य से जोड़ती हुई रचनाएँ
मुक्तक - मोती समान पंक्तियों का चयन

प्रतिध्वनि कविताओं का ऑडियो: कवि की अपनी आवाज़ में, या अन्य कलाकार द्वारा

काव्य लेख काव्य सम्बन्धित लेख

प्रकाशन का समयक्रम:
सामान्यतः महीने का प्रथम और तीसरा शुक्रवार
सम्पर्क करें | हमारा परिचय