कौआ

घर के बाहर कौआ बैठा काँव-काँव चिल्लाता है।
कौन है आने वाला इसकी खबरें कौआ लाता है।

पापा की मौसी के घर से गुड़ की भेली आनी हो,
उस दिन सुबह सवेरे उठता जैसे बुढ़िया नानी हो,
चीख-चीख कर घर वालों को कौआ राग सुनाता है।
उस दिन सबसे पहले क्यों, मुझको नहीं जगाता है ?

मास्टर जी के आने पर कौए की छुट्टी होती है।
हाथ पे पड़ते बेंत ज़ोर के, कान कनैठी होती है।
शोर सुनाई देता है बस, समझ नहीं कुछ आता है,
काला अक्षर भी, काले कौए जैसा बन जाता है।

कभी कभी दादी कहती ये दादाजी के दादा हैं।
पहचानूँ पर कैसे उनको, कौए कितने ज़्यादा हैं!
जो आकर के गरम जलेबी और मलाई खाता है,
वो ही है वो कौआ जिससे अपने घर का नाता है!

मैंने सुना दिन आएगा जब कौआ मोती खायेगा,
लेकिन शायद मोती उसके कंठ में ही फँस जाएगा!
क्या मोती खाकर कौआ सच में हंस हो जाता है?
फिर कौए की ज़िम्मेदारी आख़िर कौन निभाता है?

और भी कितने पक्षी हैं जो रोज़ द्वार पर आते हैं,
लेकिन सब कहते हैं पक्षी, बिन पानी मर जाते हैं!
कौआ कंकड़ डाल-डाल कर पानी ऊपर ले आता है,
इसीलिए तो मुझको सब चिड़ियों में कौआ भाता है!

सब कहते हैं कुछ सालों में मैं भी बड़ा हो जाऊँगा।
फिर अपनी बच्चों जैसी बातों पर खुद पछताऊँगा।
कविता में तो हर बच्चा किस्से मनगढ़े सुनाता है।
सच बस इतना है कि कौआ काँव-काँव चिल्लाता है!
- जया प्रसाद
काव्यपाठ: जोगेंद्र सिंह

काव्यालय को प्राप्त: 15 May 2021. काव्यालय पर प्रकाशित: 9 Jul 2021

***
जया प्रसाद
की काव्यालय पर अन्य रचनाएँ

 अघट घटती जा रही है
 आठ वर्ष
 कौआ
इस महीने :
'गेंद और सूरज'
नूपुर अशोक


बच्चों की एक दुनिया है,
जिसमें एक गेंद है
और एक सूरज भी है।
सूरज के ढलते ही
रुक जाता है उनका खेल
और तब भी
जब गेंद चली जाती है
अंकल की छत पर।

अंकल की दुनिया में है
टीवी और अखबार
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने :
'गुल्लू'
प्रदीप शुक्ला


'गुल्लू-मुल्लू', 'पारू बच्चा'
नाम एक से एक है अच्छा
'गौरी', 'गुल्लू', 'छोटा माँऊँ'
गिनते जाओ नाम सुनाऊँ
'गुल्ला रानी' बड़ी सयानी
दादी कहतीं सबकी नानी
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने :
'लॉकडाउन और मैं'
टुषी भट्टाचार्य


गज़ब वो दिन थे, मैदानों पर होते थे जब सारे खेल;
अब तो घर में बैठे हैं बस, सर में खूब लगाकर तेल।
पुस्तकें सारी पढ़ डाली हैं, रंग डाले हैं सारे चित्र,
धमाचौकड़ी करें भी कैसे, अब जो घर न आते मित्र।
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
संग्रह से कोई भी रचना | काव्य विभाग: शिलाधार युगवाणी नव-कुसुम काव्य-सेतु | प्रतिध्वनि | काव्य लेख
आपकी कविता | सम्पर्क करें | हमारा परिचय

a  MANASKRITI  website