अप्रतिम कविताएँ
नित्या
सुनो नित्या!
मत भूलो कि
केवल भूमिजा नहीं
यज्ञसेना भी हो तुम

सुलग रही होगी
अब भी
भीतर कहीं
अंजुरि भर अग्नि
आई थी जो
संग तुम्हारे
अंग तुम्हारे

प्रज्वलित करो उसे!

नहीं हुआ है जन्म तुम्हारा
कि करो आत्मसात
सारा दुराचार
कि समा जाओ मातृ अंक में
सुन कोई आरोप निराधार

जानो!
कि लाया गया
कि बुलाया गया
तुम्हें,
मिटाने को
अनवरत बढ़ता
अनाचार,
बार बार
- सुदर्शन शर्मा
Sudarshan Sharma
Email: [email protected]
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 नित्या
 लड़कियाँ
इस महीने :
'जो हवा में है'
उमाशंकर तिवारी


जो हवा में है, लहर में है
क्यों नहीं वह बात
मुझमें है?

शाम कंधों पर लिए अपने
ज़िन्दगी के रू-ब-रू चलना
रोशनी का हमसफ़र होना
उम्र की कन्दील का जलना
आग जो
जलते सफ़र में ...
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने :
'दिव्य'
गेटे


अनुवाद ~ प्रियदर्शन

नेक बने मनुष्य
उदार और भला;
क्योंकि यही एक चीज़ है
जो उसे अलग करती है
उन सभी जीवित प्राणियों से
जिन्हें हम जानते हैं।

स्वागत है अपनी...

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पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
होलोकॉस्ट में एक कविता
~ प्रियदर्शन

लेकिन इस कंकाल सी लड़की के भीतर एक कविता बची हुई थी-- मनुष्य के विवेक पर आस्था रखने वाली एक कविता। वह देख रही थी कि अमेरिकी सैनिक वहाँ पहुँच रहे हैं। इनमें सबसे आगे कर्ट क्लाइन था। उसने उससे पूछा कि वह जर्मन या अंग्रेजी कुछ बोल सकती है? गर्डा बताती है कि वह 'ज्यू' है। कर्ट क्लाइन बताता है कि वह भी 'ज्यू' है। लेकिन उसे सबसे ज़्यादा यह बात हैरानी में डालती है कि इसके बाद गर्डा जर्मन कवि गेटे (Goethe) की कविता 'डिवाइन' की एक पंक्ति बोलती है...

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