Toggle navigation
English Interface
संग्रह से कोई भी रचना
काव्य विभाग
शिलाधार
युगवाणी
नव-कुसुम
काव्य-सेतु
मुक्तक
प्रतिध्वनि
काव्य लेख
सहयोग दें
अप्रतिम कविताएँ
प्राप्त करें
✉
अप्रतिम कविताएँ
प्राप्त करें
✉
अस्तित्व
मैनें कई बार
कोशिश की है
तुम से दूर जानें की,
लेकिन
मीलों चलनें के बाद
जब मुड़ कर देखता हूँ
तो तुम्हें
उतना ही करीब पाता
हूँ |
तुम्हारे इर्द
गिर्द
वृत्त की
परिधि बन कर रह गया
हूँ मैं ।
-
अनूप भार्गव
विषय:
प्रेम (63)
गणित विज्ञान (9)
रिश्ते (17)
सहयोग दें
विज्ञापनों के विकर्षण से मुक्त, काव्य के सुकून का शान्तिदायक घर... काव्यालय ऐसा बना रहे, इसके लिए सहयोग दे।
₹ 500
₹ 250
अन्य राशि
अनूप भार्गव
की काव्यालय पर अन्य रचनाएँ
अगले खम्भे तक का सफ़र
अस्तित्व
प्रतीक्षा
यूँ ही ...
रिश्ते
हाइकु
इस महीने :
'रंग'
गीता दूबे
तुम्हारे पास बहुत से रंग हैं
दोस्ती, प्यार, इकरार,
उम्मीदों और खुशियों के।
सपनों का तो रंग-बिरंगा
चंदोवा ही तान दिया है तुमने।
निश्छल मुस्कान का ... ..
पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
इस महीने :
'गले मिलते रंग'
विनोद दास
आह्लाद में डूबे रंग खिलखिला रहे हैं
इतने रंग हैं
कि फूल भी चुरा रहे हैं रंग
आज तितलियों के लिए
गले मिल रहे हैं रंग
जब मिलता है गले एक रंग
दूसरे रंग से
बदल जाता है ...
..
पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
कविताओं के संग एक खेल खेलें?
यह है
काव्यालय क्विज़!
देखें आपके कितने उत्तर सही आते हैं।
संग्रह से कोई भी रचना
| काव्य विभाग:
शिलाधार
युगवाणी
नव-कुसुम
काव्य-सेतु
|
प्रतिध्वनि
|
काव्य लेख
सम्पर्क करें
|
हमारा परिचय
सहयोग दें