अप्रतिम कविताएँ पाने
अस्तित्व
मैनें कई बार
कोशिश की है
तुम से दूर जानें की,
लेकिन
मीलों चलनें के बाद
जब मुड़ कर देखता हूँ
तो तुम्हें
उतना ही करीब पाता
हूँ |

तुम्हारे इर्द
गिर्द
वृत्त की
परिधि बन कर रह गया
हूँ मैं ।
- अनूप भार्गव
Anoop Bhargava
email: [email protected]
Anoop Bhargava
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अनूप भार्गव
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जो देवा बसता है
..

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..

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