चंदा की धरती पर मुझ सी
सुंदर परियाँ रहती हैं
मैं भी वहीं से आयी हूँ
मेरी मम्मी कहती हैं।
मेरे भी जब पर उग आयें
चंदा पर मैं जाऊँगी
आसमान के पट पर मैं भी
तारे खूब सजाऊँगी
परियों की हूँ शहज़ादी मैं
मेरी मम्मी कहती हैं
चंदा की धरती पर मुझ सी
सुंदर परियाँ रहती हैं।
सीढ़ी डालूँगी ऊपर से
सीधे माँ की गोद तलक
झट-पट नीचे आ जाऊँगी
धीरे-धीरे सरक-सरक
याद सतायेगी जब घर की
मेरी मम्मी कहती हैं
चंदा की धरती पर मुझ सी
सुंदर परियाँ रहती हैं।
बादल पर मैं सैर को जाऊँ
अंतरिक्ष को छू लूँगी
तारों सी झिलमिल मुस्कानें
सबके मुख पर घोलूँगी
माँ की मैं लाड़ो रानी हूँ
मेरी मम्मी कहती हैं
चंदा की धरती पर मुझ सी
सुंदर परियाँ रहती हैं।
नहीं नाचूँगा मैं
तुम्हारे युद्ध के
नगाड़ों पर। न ही दूँगा
अपनी आत्मा, न ही अपनी अस्थियाँ
तुम्हारे युद्ध के नगाड़ों को। नहीं
नाचूँगा तुम्हारी
ताल पर। मैं जानता हूँ उस ताल को।
जान नहीं है उसमें। जिस चमड़े को
..
मुझमें ऐसी तरलता हो जैसे कि मुझमें नदी बह रही हो। मेरे तट पर टीलों पर मन्दिर हों और प्रिय-अप्रिय सभी को मैं स्वीकारूँ -- मच्छ मगर घड़ियाल, सभी का रहना मुझमें हो। मेरा बदन काट कर नहरें सभी को पोषण पहुँचाएँ।