झीनी-झीनी बीनी चदरिया
झीनी-झीनी बीनी चदरिया,
काहे कै ताना, काहै कै भरनी, कौन तार से बीनी चदरिया।
इंगला पिंगला ताना भरनी, सुखमन तार से बीनी चदरिया॥
आठ कँवल दल चरखा डोलै, पाँच तत्त गुन तीनी चदरिया।
साँई को सियत मास दस लागै, ठोक-ठोक कै बीनी चदरिया॥
सो चादर सुर नर मुनि ओढ़ी, ओढ़ी कै मैली कीनी चदरिया।
दास 'कबीर' जतन से ओढ़ी, ज्यों की त्यों धरि दीनी चदरिया॥
- कबीरदास

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कबीरदास
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तार्किक विचार और भावना को हम अपने जीवन में समान महत्व दे सकते हैं। दोनों एक दूसरे के विरोधी नहीं है। इसके जीते जागते उदाहरण हैं डॉ. विनोद तिवारी। यह संतुलन वह कैसे बनाए रखते हैं? ८० के उम्र में भी अपने काम और ज़िन्दगी के प्रति इतनी ऊर्जा उन्हें कहाँ से मिलती है?

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"एक मुलाकात 'पंखुरी' के साथ" भाग 4 -- विनोद तिवारी के संग हो रहे वार्तालाप का अंतिम भाग

लखनऊ के एक बड़े प्रकाशक की मुलाकात पाँचवी कक्षा के एक बालक से हुई -- तो क्या बातें हुईं दोनों में? वह बालक उस उम्र में कौन सी किताबें पढ़ रहा था? उसकी प्रथम प्रकाशित कविता कौन सी थी?

देखिए "बाल विनोद - लिखते पढ़ते कविता" "एक मुलाकात 'पंखुरी' के साथ" भाग 3 -- अद्भुत कविताओं के रचनाकार विनोद तिवारी बचपन में क्या पढ़ते थे, लिखते थे -- एक कवि की बालक से कवि बनने की यात्रा।

बचपन में विनोद तिवारी एक तलाश पर चल दिए। इन्द्रधनुष के उस पार जाना था। बचपन में ही एक उपन्यास में कुछ पढ़ कर उन्होंने अपना करियर चुना। बात उसी तलाश की थी।

सात-आठ साल की उम्र में कविता लिखनी भी शुरु की। उस वक्त उनके हिन्दी के अध्यापक ने जो कहा उसका असर अब तक उनकी हर कविता पर रहती है।

प्रस्तुत है वीडियो श्रृंखला एक मुलाकात 'पंखुरी' के साथ का भाग 2 : विनोद तिवारी और इन्द्रधनुष अब असली वार्तालाप शुरु हुई है, और कितनी दिलचस्प! बाल मन पर हुए प्रभाव जिसने जीवन भर की दिशा तय की।

शामली उत्तरप्रदेश में एक बहु-प्रतिभाशाली फूल की पंखुरी रहतीं है -- पारुल ’पंखुरी’। वह एक सफल कवयित्री, यूट्यूबर, गायिका हैं जो नित नए प्रयोग करती रहती हैं। काव्यालय परिवार का वह अभिन्न अंग हैं।

उन्होंने एक साक्षात्कार आयोजित किया, दो दिग्गज कवि विनोद तिवारी और अमृत खरे के साथ। काव्यालय की संस्थापिका वाणी मुरारका भी उपस्थित हैं। देखिए वीडियो श्रृंखला का पहला भाग

एक मुलाकात ’पंखुरी’ के साथ 1 - परिचय
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