अप्रतिम कविताएँ

मंगलम्
भूमि मंगलम् (भूमि मंगलम्)
उदक मंगलम् (उदक मंगलम्)
अग्नि मंगलम् (अग्नि मंगलम्)
वायु मंगलम् (वायु मंगलम्)
गगन मंगलम् (गगन मंगलम्)
सूर्य मंगलम् (सूर्य मंगलम्)
चन्द्र मंगलम् (चन्द्र मंगलम्)
जगत मंगलम् (जगत मंगलम्)
जीव मंगलम् (जीव मंगलम्)
देह मंगलम् (देह मंगलम्)
मनो मंगलम् (मनो मंगलम्)
आत्म मंगलम् (आत्म मंगलम्)
सर्व मंगलम् भवतु भवतु भवतु
सर्व मंगलम् भवतु भवतु भवतु
सर्व मंगलम् भवतु भवतु भवतु।

- अज्ञात
उदक : पानी; भवतु : ऐसा हो
सितार वादक पंडित रवि शंकर के एल्बम Chants of India से
विषय:
विस्तार (13)

काव्यालय पर प्रकाशित: 27 Dec 2019

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'न्यूज़ चैनल'
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यहाँ त्रासदियाँ
प्रहसन में बदली जाती हैं,
भाषा तमाशे में
और लोग कठपुतलियों में।
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इसका पेट भरती है।
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किया जाता है
..

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'राम की जल समाधि'
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पश्चिम में ढलका सूर्य उठा वंशज सरयू की रेती से,
हारा-हारा, रीता-रीता, निःशब्द धरा, निःशब्द व्योम,
निःशब्द अधर पर रोम-रोम था टेर रहा सीता-सीता।

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धरती को मैं किसलिए सहूँ, धरती मुझको किसलिए सहे।
तू कहाँ खो गई वैदेही, वैदेही तू खो गई कहाँ,
..

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आशाओं के कमल
खिला जाते हैं
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निराशा की ... ..

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