वह चिढ़ाता कोना
चेहरे पर फैल आए बालों को,
अपनी अलसाई उंगलियो से हटाया था,
कुछ समय खुद मे ही खोने के बाद
जब तुम्हारी तरफ़ देखा तो,
तुम अभी भी सो रहे थे,
तुम्हे छुने की कोशिश मे,
मैने हाथ भी बढ़ाया था,
पर तुम तब भी सो रहे थे,
कुछ खाली सा लगा मुझे मुझमें
टटोलने का मन भी हुआ
शायद कोई कोना कहीं बंद पड़ा हो
और मेरे ढूँढने पर मिल जाए वो
पर कहीं कुछ अभी भी सूना था
एक झुंझलाहट सी हुई खुद पर
वेहम है शायद मेरा
कह कर खुद को झिड़क दिया मैने
मगर वह खाली कोना अभी भी चिढ़ा रहा था
हिम्मत बटोर कर मैं उस कोने से ही पूछा,
क्या चाहिए तुझे?
अब और क्या बाकी है?
उसने तनिक दबी हँसी से कहा,
ये मूरख किसे बनाती हो?
जिसे छुकर उसके होने का यकीन खुद को दिलाती हो,
क्या सच मे उसे ही पाना चाहती हो?
लगा की चोरी पकड़ ली गयी हो मेरी,
हर स्पर्श में मैंने जो महसूस किया
क्या सिर्फ़ तुम्हारी आकुलता नही थी?
एक ज़रूरत,
उसके आगे सब शून्य था
और यही शून्य अब उस कोने मे जा बैठा था
- जागृति जायसवाल
Jagriti Jaiswal
Email : [email protected]
Jagriti Jaiswal
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तोड़ दो सीमा क्षितिज की,
गगन का विस्तार ले लो


विनोद तिवारी की कविता "प्यार का उपहार" का वीडियो। उपहार उनका और वीडियो द्वारा उपहार का सम्प्रेषण भी वह ही कर रहे हैं। सरल श्रृंगार रस और अभिसार में भीगा, फिर भी प्यार का उपहार ऐसा जो व्यापक होने को प्रेरित करे।

प्यार का उपहार
इस महीने :
'अधूरी साधना'
वाणी मुरारका


प्रियतम मेरे,
सब भिन्न भिन्न बुनते हैं
गुलदस्तों को,
भावनाओं से,
विचारों से।
मैं तुम्हे बुनूँ
अपनी साँसों से।
भावनायें स्थिर हो जाएँ,
विचारधारा भी
..

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इस महीने :
'प्रेम अक्षत'
आभा सक्सेना


आप सुन तो रहें हैं
मेरे गीत यह
मन के मन्दिर में दीपक
जलाये तो हैं
आपके सामने बैठ कर
अनगिनत, अश्रु पावन
नयन से गिराये तो हैं
नेह की डालियों से
सुगन्धित सुमन
सांवरे श्री चरण पर
चढ़ाये तो हैं
..

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