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धत्
सीधा
मेरी आँखों में
बेधड़क घूरती
बिल्ली सा
वह एक
निडर ख़्याल तेरा
टाँगों के बीच
पूँछ दबा
मेरी एक धत् से
भाग लिया।
-
दिव्या माथुर
Divya Mathur
email:
[email protected]
विषय:
अन्तर्मन (14)
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निश्छल मुस्कान का ... ..
पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
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विनोद दास
आह्लाद में डूबे रंग खिलखिला रहे हैं
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आज तितलियों के लिए
गले मिल रहे हैं रंग
जब मिलता है गले एक रंग
दूसरे रंग से
बदल जाता है ...
..
पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
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