विवशता
इस बार नहीं आ पाऊंगा

         पर निश्चय ही यह हृदय मेरा
         बेचैनी से अकुलाएगा
         कुछ नीर नैन भर लाएगा
         पर जग के कार्यकलापों से
         दाइत्वों के अनुपातों से
         हारूंगा, जीत न पाऊंगा

इस बार नहीं आ पाऊंगा

         जब संध्या की अंतिम लाली
         नीलांबर पर बिछ जाएगी
         नभ पर छितरे घनदल के संग
         जब संध्या रागिनी गाएगी
         मन से कुछ कुछ सुन तो लूंगा
         पर साथ नहीं गा पाऊंगा

इस बार नहीं आ पाऊंगा

         जब प्रातः की मंथर समीर
         वृक्षों को सहला जाएगी
         मंदिर की घंटी दूर कहीं
         प्रभु की महिमा को गाएगी
         तब जोड़ यहीं से हाथों को
         अपना प्रणाम पहुंचाऊंगा

इस बार नहीं आ पाऊंगा

         जब ग्रीष्म काल की हरियाली
         अमराई पर छा जाएगी
         कूहू कूहू कर के कोयल
         रस आमों में भर जाएगी
         रस को पीने की जिद करते
         मन को कैसे समझाऊंगा

इस बार नहीं आ पाऊंगा

         जब इठलाते बादल के दल
         पूरब से जल भर लाएंगे
         जब रंग बिरंगे पंख खोल
         कर मोर नृत्य इतराएंगे
         मेरे पग भी कुछ थिरकेंगे
         पर नाच नहीं मैं पाऊंगा

इस बार नहीं आ पाऊंगा

         जब त्यौहारों के आने की
         रौनक होगी बाजारों में
         खुशबू जानी पहचानी से
         बिखरेगी घर चौबारों में
         उस खुशबू की यादों को ले
         मैं सपनों में खो जाऊंगा

इस बार नहीं आ पाऊंगा
- राजीव स्कसेना
Rajiv Saxena
Email : [email protected]
Rajiv Saxena
Email : [email protected]

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तोड़ दो सीमा क्षितिज की,
गगन का विस्तार ले लो


विनोद तिवारी की कविता "प्यार का उपहार" का वीडियो। उपहार उनका और वीडियो द्वारा उपहार का सम्प्रेषण भी वह ही कर रहे हैं। सरल श्रृंगार रस और अभिसार में भीगा, फिर भी प्यार का उपहार ऐसा जो व्यापक होने को प्रेरित करे।

प्यार का उपहार
इस महीने :
'अधूरी साधना'
वाणी मुरारका


प्रियतम मेरे,
सब भिन्न भिन्न बुनते हैं
गुलदस्तों को,
भावनाओं से,
विचारों से।
मैं तुम्हे बुनूँ
अपनी साँसों से।
भावनायें स्थिर हो जाएँ,
विचारधारा भी
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने :
'प्रेम अक्षत'
आभा सक्सेना


आप सुन तो रहें हैं
मेरे गीत यह
मन के मन्दिर में दीपक
जलाये तो हैं
आपके सामने बैठ कर
अनगिनत, अश्रु पावन
नयन से गिराये तो हैं
नेह की डालियों से
सुगन्धित सुमन
सांवरे श्री चरण पर
चढ़ाये तो हैं
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
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