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किरण सिपानी
किरण सिपानी की काव्यालय पर रचनाएँ
यूंँ पति की मांँ बनते जाना

कलकत्ता विश्वविद्यालय द्वारा एम.ए. हिन्दी, 1971 में स्वर्ण पदक प्राप्त, भारतीय भाषा परिषद द्वारा शिक्षा सम्मान और जैन-सभा विचार-मंच द्वारा फूलकुमारी कांकरिया शिक्षा-सेवा-साधना-सम्मान से सम्मानित डॉ. किरण सिपानी का जीवन शिक्षण और साहित्य से जुड़ा रहा है।

उन्होंने विक्टोरिया इंस्टीट्यूट और तारादेवी हरखचंद कांकरिया जैन कॉलेज, काशीपुर में अंशकालीन प्राध्यापन किया है और आचार्य जगदीश चंद्र बोस कॉलेज में हिन्दी विभागाध्यक्ष, आर्ट्स कोऑर्डिनेटर रही हैं। दूरदर्शन-आकाशवाणी से इनकी साहित्यिक वार्ताओं, कविताओं और लघुकथाओं का प्रसारण हो चुका है। दशम संस्कृत विश्व सम्मेलन (1997) एवं अन्य गोष्ठियों में इन्होंने आलेख-पाठ किया है। कई अकादमिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं में इनकी सक्रिय भागीदारी रही है।

इनकी प्रकाशित कृतियाँ हैं -
• महाकवि स्वयंभू के पउमचरिउ का काव्यशास्त्रीय अध्ययन
• महाकवि स्वयंभू का पउमचरिउ (जैन रामायण) : एक अनुशीलन
• कोलाज : सुकीर्ति गुप्ता (आत्मकथा: संयोजन-प्रकाशन)
• मेरी जापान यात्रा : दाओ का कबूलनामा (यात्रा-संस्मरण)
• आँच रिश्तों की (आत्मकथा) – प्रकाशनाधीन
• तसल्लीयाँ पचपन वर्ष (काव्य-संग्रह) – प्रकाशनाधीन
• स्मरण को पाथेय बनने दो (स्मरण: इलारानी सिंह – सह-संपादन)
• विचार-सरणी (निबंध संग्रह : सह-संपादन)
• करवट (उत्तर कलकत्ता मारवाड़ी युवा मंच की पत्रिका – 1989, सह-संपादन)
• प्रबुद्ध व्यक्तियों, साहित्यकारों एवं समसामयिक विषयों पर आलेख
• विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लघुकथा, कविता, संस्मरण, पुस्तक-समीक्षाओं का प्रकाशन


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