बीच बाज़ार
खिलौने वाले
के खिलौने
की आवाज़ से
आकर्षित हो
कदम उसकी
तरफ बढ़े,
मैंने छुआ,
सहलाया उन्हें
व एक खिलौने
को अंक में भरा
कि पीछे से कर्कष
आवाज़ ने मुझे
झंझोड़ा
‘‘तुम्हारी बच्चों की सी
हरकतें कब खत्म होंगी!’’
सुनकर मेरा नन्हा बच्चा
सहम सा गया
मेरी प्रौढ़ देह के अन्दर।
मुझमें ऐसी तरलता हो जैसे कि मुझमें नदी बह रही हो। मेरे तट पर टीलों पर मन्दिर हों और प्रिय-अप्रिय सभी को मैं स्वीकारूँ -- मच्छ मगर घड़ियाल, सभी का रहना मुझमें हो। मेरा बदन काट कर नहरें सभी को पोषण पहुँचाएँ।