घर आवो जी सजन मिठ बोला
घर आवो जी सजन मिठ बोला।
तेरे खातर सब कुछ छोड्या, काजर, तेल तमोला॥
जो नहिं आवै रैन बिहावै, छिन माशा छिन तोला।
'मीरा' के प्रभु गिरिधर नागर, कर धर रही कपोला॥
- मीराबाई

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मीराबाई
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काव्यालय की विशेष प्रस्तुति
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दाम्पत्य जीवन में अहं के टकरार के बाद -
'पुनर्मिलन'
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फिर तुम्हारे अंक में नव प्रीत के दो पल बिता लूँ
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फिर तुम्हारे अंक में नव प्रीत के दो पल बिता लूँ ...
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