तेरी हँसी कृष्ण विवर सी
हमारे ब्रह्माण्ड में कृष्ण विवर नामक अत्यंत सघन पिंड हैं जिन्हें अंग्रेजी में black hole कहते हैं। इनका गुरुत्वाकर्षण इतना सशक्त होता है कि उनमें सब कुछ अपने में समा लेने की और सब कुछ ग्रहण कर लेने की क्षमता होती है। यह कविता इसी प्रतीक पर आधारित है।

छोटी सी दुनिया
कितने सारे लोग
रज तम सत का
विभिन्न संयोग।
सहूलियत के हिसाब से
बाँट लिया,
कितने नामों से
पुकार लिया,
मान्यताओं और परम्पराओं में
जकड़ लिया।
किसी ने कहा-
तू है
किसी ने कहा-
तू नहीं है
किसी ने मौन साध लिया।
कोई कहता-
तू एक है
कोई कहता-
तू अनेक है
किसी ने माना–
तेरा रूप है
किसी ने माना-
तू अरूप है
सदियों से बहस होती रही
बहस जंग में तब्दील हुई
तलवारें खिंच गई
बंदूकें तन गई
और तू
हँसता रहा

तेरी हँसी-
कृष्ण विवर सी
ज्ञान-अज्ञान
सूक्ष्म-स्थूल
प्रेम-घृणा
स्वाद-अस्वाद
मान-अपमान
जन्म-मृत्यु
कण-कण
हर क्षण
समाता रहा
समाता रहा
और तू
हँसता रहा
हँसता रहा
हँसता रहा
- पूनम सिन्हा

काव्यालय पर प्रकाशित: 27 Dec 2016

***
इस महीने :
'पेड़'
जोएस किलमर


मैं शायद कभी न देखूँगा,
एक पेड़ सा सुन्दर कविता।

पेड़, जिसके वह भूखे होंठ,
वसुधा स्तन-धारा पे हैं लोट।

पेड़, जिसका रुख ईश्वर ओर,
पल्लवित भुजाएं विनय विभोर।
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने :
'चल पथिक तू हौले से'
प्रिया एन. अइयर


टहल रहा गर भोर से पहले
पग तू रखना धीरे से
जगे हुए हैं जीव-जंतु
मानव तुमसे पहले से

खरगोश, कीट और खग निकले
नीड़, बिल, कुंड से खुल के
चंचल अबोध छौने संग
चली हिरन निर्भयता  से

..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
चलो समय के साथ चलेंगे,
परिवर्तन होगा धरती पर।
नया ज़माना पैदा होगा,
बूढ़ी दुनिया की अर्थी पर।

जो कुछ हम पर बीत चुकी है,
उस से मुक्त रहो, ओ नवयुग।
नए नए फूलों से महको,
मेरे मधुवन, जीयो जुग जुग।

~ विनोद तिवारी की कविता "मेरे मधुवन" का अंश संकलन "समर्पित सत्य समर्पित स्वप्न" से

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