प्रवाह
बनकर नदी जब बहा करूंगी,
तब क्या मुझे रोक पाओगे?
अपनी आँखों से कहा करूँगी,
तब क्या मुझे रोक पाओगे?
हर कथा रचोगे एक सीमा तक
बनाओगे पात्र नचाओगे मुझे
मेरी कतार काटकर तुम
एक भीड़ का हिस्सा बनाओगे मुझे
मेरी उड़ान को व्यर्थ बता
हंसोगे मुझपर, टोकोगे मुझे
एक तस्वीर बता, दीवार पर चिपकाओगे मुझे।
पर जब ...
अपने ही जीवन से कुछ पल चुराकर
मैं चुपके से जी लूँ!
तब क्या मुझे रोक पाओगे?
तुम्हे सोता देख,
मैं अपने सपने सी लूँ!
अपनी कविता के कान भरूंगी,
तब क्या मुझे रोक पाओगे?
जितना सको प्रयास कर लो इसे रोकने की,
इसके प्रवाह का अन्दाज़ा तो मुझे भी नहीं अभी!
- अजंता शर्मा
Ajanta Sharma
email: [email protected]
Ajanta Sharma
email: [email protected]

***
तोड़ दो सीमा क्षितिज की,
गगन का विस्तार ले लो


विनोद तिवारी की कविता "प्यार का उपहार" का वीडियो। उपहार उनका और वीडियो द्वारा उपहार का सम्प्रेषण भी वह ही कर रहे हैं। सरल श्रृंगार रस और अभिसार में भीगा, फिर भी प्यार का उपहार ऐसा जो व्यापक होने को प्रेरित करे।

प्यार का उपहार
इस महीने :
'अधूरी साधना'
वाणी मुरारका


प्रियतम मेरे,
सब भिन्न भिन्न बुनते हैं
गुलदस्तों को,
भावनाओं से,
विचारों से।
मैं तुम्हे बुनूँ
अपनी साँसों से।
भावनायें स्थिर हो जाएँ,
विचारधारा भी
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने :
'प्रेम अक्षत'
आभा सक्सेना


आप सुन तो रहें हैं
मेरे गीत यह
मन के मन्दिर में दीपक
जलाये तो हैं
आपके सामने बैठ कर
अनगिनत, अश्रु पावन
नयन से गिराये तो हैं
नेह की डालियों से
सुगन्धित सुमन
सांवरे श्री चरण पर
चढ़ाये तो हैं
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
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