एक शब्द की कविता
एक शब्द की कविता
तुम।

एक शब्द में पृथ्वी सारी
तुम।
एक शब्द में सृष्टि सारी
तुम।

क्या रिश्ता होगा जब तुम ही हो
यह वाणी तेरी
- तुम

काव्यालय को प्राप्त: 10 Jun 2017. काव्यालय पर प्रकाशित: 27 Sep 2019

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इस महीने :

'कॉरोना काल का प्रेम गीत'
अमृत खरे


यह प्रतीक्षा की घड़ी है,
तुम उधर असहाय, हम भी हैं इधर निरुपाय
उस पर
बीच में दुविधा अड़ी है!
यह प्रतीक्षा की घड़ी है!

यूँ हुए अभिशप्त,
अर्जित पुण्य
हो निष्फल गए हैं,
स्वर्ग से लाये धरा पर
सूख सब
परिमल गए हैं,

यह समीक्षा की घड़ी है ..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
इस महीने :

'समर्पित सत्य समर्पित स्वप्न'
विनोद तिवारी


विनोद तिवारी की कविताओं का संकलन
काव्यालय का पुस्तक प्रकाशन
वाणी मुरारका की चित्रकला के संगे
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
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