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बूँदें
बरसती हैं बूँदें
झूमते हैं पत्ते
पत्ता-पत्ता जी रहा है
पल पल को
आने वाले कल से बेख़बर
-
कुसुम जैन
विषय:
वर्षा (4)
काव्यालय को प्राप्त: 26 Sep 2021. काव्यालय पर प्रकाशित: 1 Oct 2021
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इस महीने :
'रंग'
गीता दूबे
तुम्हारे पास बहुत से रंग हैं
दोस्ती, प्यार, इकरार,
उम्मीदों और खुशियों के।
सपनों का तो रंग-बिरंगा
चंदोवा ही तान दिया है तुमने।
निश्छल मुस्कान का ... ..
पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
इस महीने :
'गले मिलते रंग'
विनोद दास
आह्लाद में डूबे रंग खिलखिला रहे हैं
इतने रंग हैं
कि फूल भी चुरा रहे हैं रंग
आज तितलियों के लिए
गले मिल रहे हैं रंग
जब मिलता है गले एक रंग
दूसरे रंग से
बदल जाता है ...
..
पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
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