अतीत
            याद किसी की गीत बन गई !

कितना अलबेला सा लगता था, मुझे तुम्‍हारा हर सपना
साकार बनाने से पहले , क्यों फेरा प्रयेसी मुख अपना
तुम थी कितनी दूर और मैं, नगरी के उस पार खङा था
अरुण कपोलों पर काली सी, दो अलकों का जाल पङा था
अब तुम ही अनचाहे मन से अंतर का संगीत बन गई ।

            याद किसी की गीत बन गई !

उस दिन हंसता चांद और तुम , झांक रही छत से मदमाती
आंख मिचौनी सी करती थीं, लट संभालती नयन घुमाती
कसे हुए अंगों में झीने, पट का बंधन भार हो उठा
और तुम्‍हारी पायल से, मुखरित मेरा संसार हो उठा
सचमुच वह चितवन तो मेरे, अंतर्तम का मीत बन गई ।

            याद किसी की गीत बन गई !

तुम ने जो कुछ दिया आज वह मेरा पंथ प्रवाह बना है
आज थके नयनों में पिघला, आंसू मन की दाह बना है
अब न शलभ की पुलक प्रतीक्षा, और न जलने की अभिलाषा
सांसों के बोझिल बंधन में, बंधी अधूरी सी परिभाषा
लेकिन यह तारों की तङपन, धङकन की चिर प्रीत बन गई ।

            याद किसी की गीत बन गई !
- महावीर शर्मा
Mahavir Sharma
email: mahavirpsharma at yahoo dot co dot uk
Mahavir Sharma
email: mahavirpsharma at yahoo dot co dot uk

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तोड़ दो सीमा क्षितिज की,
गगन का विस्तार ले लो


विनोद तिवारी की कविता "प्यार का उपहार" का वीडियो। उपहार उनका और वीडियो द्वारा उपहार का सम्प्रेषण भी वह ही कर रहे हैं। सरल श्रृंगार रस और अभिसार में भीगा, फिर भी प्यार का उपहार ऐसा जो व्यापक होने को प्रेरित करे।

प्यार का उपहार
इस महीने :
'अधूरी साधना'
वाणी मुरारका


प्रियतम मेरे,
सब भिन्न भिन्न बुनते हैं
गुलदस्तों को,
भावनाओं से,
विचारों से।
मैं तुम्हे बुनूँ
अपनी साँसों से।
भावनायें स्थिर हो जाएँ,
विचारधारा भी
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
इस महीने :
'प्रेम अक्षत'
आभा सक्सेना


आप सुन तो रहें हैं
मेरे गीत यह
मन के मन्दिर में दीपक
जलाये तो हैं
आपके सामने बैठ कर
अनगिनत, अश्रु पावन
नयन से गिराये तो हैं
नेह की डालियों से
सुगन्धित सुमन
सांवरे श्री चरण पर
चढ़ाये तो हैं
..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
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