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इस महीने : तुम
'एक शब्द की कविता'

एक शब्द की कविता
तुम।

एक शब्द में पृथ्वी सारी
तुम।
एक शब्द में सृष्टि सारी
तुम।

क्या रिश्ता होगा जब तुम ही हो
यह वाणी तेरी

~ तुम
'तुम नहीं हो?'
अंजु वर्मा


है धुंधलका
हल्का हल्का
ठहरा ठहरा
पाँव पल का
मन हिंडोला डोलता है
मूक अश्रु पूछता है
तुम नहीं हो?
...

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