इस महीने
'सृष्टि का सार'
अंशु जौहरी


रंगों की मृगतृष्णा कहीं
डरती है कैनवस की उस सादगी से
जिसे आकृति के माध्यम की आवश्यकता नहीं
जो कुछ रचे जाने के लिये
नष्ट होने को है तैयार ...
पूरी रचना यहाँ पढें...
'अबूझ है हर पल यहाँ'
अनीता निहलानी


नहीं, कुछ नहीं कहा जा सकता
हुआ जा सकता है
खोया जा सकता है
डूबा जा सकता है ...
पूरी रचना यहाँ पढें...
इस महीने की अगली प्रस्तुति
शुक्रवार 24 नवम्बर को

सूचना पाने के लिए
ईमेल दर्ज़ करें
नई प्रकाशित कवितायें
सीमा अग्रवाल
सोनू हंस
शबनम शर्मा
प्रतिध्वनि में नया ऑडियो
रवीन्द्रनाथ ठाकुर
नीशू बाल्यान
गोपाल गुंजन
महादेवी वर्मा
सारी रचनाएँ काव्यालय के इन विभागों में संयोजित हैं:
20वी सदी के पूर्व हिन्दी का शिलाधार काव्य
20वी सदी के प्रारम्भ से समकालीन काव्य
उभरते कवियों की रचनाएँ
अन्य भाषाओं के काव्य से जोड़ती हुई रचनाएँ
मोती समान पंक्तियों का चयन
कविताओं का ऑडियो: कवि की अपनी आवाज़ में, या अन्य कलाकार द्वारा:
काव्य सम्बन्धित लेख:
प्रकाशन का समयक्रम:
सामान्यतः महीने का प्रथम और तीसरा शुक्रवार