व्यथा जी उठी
अचेत की धूल में गढ़ी,
जंग से मढ़ी,
बरसों पहले की व्यथा,
मौन थी, सुप्त थी।
अपने आपको लपेटे थी।
चेतन ने उसे गाड़ा था यहाँ,
सँभाल न पा रहा था, अपने यहाँ।
उस दिन किसी ने,
अनजाने में
उसे छू लिया,
तो वह कराह उठी,
कुलबुला उठी,
मृत व्यथा
फिर जीवित हो गयी थी।
चेतन ने भी
उसके जी उठने पर
कुछ अश्रु-बूँदें
बहायी थीं।
- गीता मल्होत्रा
Geeta Malhotra
Email: geetam.kavita@gmail.com
Geeta Malhotra
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इस महीने - काव्यालय की विशेष प्रस्तुति
#5 बिना मेरे कोई भी अर्थ कैसे निकल पाता तुम्हारे इतिहास का
#4 युद्ध के बाद कृष्ण पर क्या बीत रही होगी - वह सपने में देखती है
#3 तुम्हारे महान बनने में - क्या मेरा कुछ टूट कर बिखर गया है कनु!
#2 कृष्ण द्वारका चले गए हैं - और उनकी प्रिया? उसका संसार?
#1 उस दिन कृष्ण अपनी प्रिया को कितनी देर वंशी से टेरते रहे -