पंथ होने दो अपरिचित
पंथ होने दो अपरिचित
प्राण रहने दो अकेला!

और होंगे चरण हारे,                 
अन्य हैं जो लौटते दे शूल को संकल्प सारे;
दुखव्रती निर्माण-उन्मद
यह अमरता नापते पद;
बाँध देंगे अंक-संसृति से तिमिर में स्वर्ण बेला!

दूसरी होगी कहानी                 
शून्य में जिसके मिटे स्वर, धूलि में खोई निशानी;
आज जिसपर प्रलय विस्मित,
मैं लगाती चल रही नित,
मोतियों की हाट औ, चिनगारियों का एक मेला!

हास का मधु-दूत भेजो,                 
रोष की भ्रूभंगिमा पतझार को चाहे सहेजो;
ले मिलेगा उर अचंचल
वेदना-जल स्वप्न-शतदल,
जान लो, वह मिलन-एकाकी विरह में है दुकेला!
- महादेवी वर्मा
काव्यपाठ: शरद तिवारी
सम्पादकीय: पहले "आज जिसपर प्रलय विस्मित" ग़लती से "आज जिसपर प्यार विस्मित" लिखा था। वही ग़लती ऑडियो में रह गई है। पंक्ति महादेवी वर्मा की आत्मिका देख कर सुधारी गई है।

***
महादेवी वर्मा
की काव्यालय पर अन्य रचनाएँ

 कौन तुम मेरे हृदय में
 जो तुम आ जाते एक बार
 तुम मुझमें प्रिय! फिर परिचय क्या
 पंथ होने दो अपरिचित
 प्रिय चिरन्तन है सजनि
 मेरे दीपक
इस महीने
'गा रही मैं गीत में तूफ़ान'
सूर्यकुमारी माहेश्वरी


गा रही मैं गीत में तूफ़ान!

आज जबकि सप्त सागर खौलते हैं
आज जबकि प्रलय के स्वर गूंजते हैं
आज घिरता आ रहा जब विश्व का अवसान
गा रही मैं गीत में तूफ़ान!
..
पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
इस महीने
'यह अमरता नापते पद - महादेवी वर्मा को श्रद्धांजलि'
शरद तिवारी



बात उन दिनों की है जब मैं क्रोस्थवेट कॉलेज, इलाहाबाद में ग्यारहवीं-बारहवीं कक्षा में पढ़ती थी। भारत की स्वतंत्रता को भी अभी 11 - 12 वर्ष ही हुए थे। उन दिनों इलाहाबाद हिन्दी साहित्य का गढ़ माना जाता था। हिन्दी के कई दिग्गज साहित्यकार इलाहाबाद के निवासी थे। इनमें से तीन प्रमुख नाम थे निराला, सुमित्रानंदन पंत, और महादेवी वर्मा, जिन्हे हिन्दी में छायावाद का अग्रदूत कहा जाता है। इन तीनो में मेरे लिए और मेरी सहपाठी सखियों के लिए महादेवी वर्मा का विशेष भावनात्मक महत्त्व था, क्योंकि वह भी हमारे क्रोस्थवेट कॉलेज में ही प्रशिक्षित हुयी थीं। ..
पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें...
अगली प्रस्तुति
शुक्रवार 7 सितम्बर को

सूचना पाने के लिए
ईमेल दर्ज़ करें
संग्रह से कोई भी कविता | काव्य विभाग: शिलाधार युगवाणी नव-कुसुम काव्य-सेतु | प्रतिध्वनि | काव्य लेख
आपकी कविता | सम्पर्क करें | हमारा परिचय

a  MANASKRITI  website