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वाणी मुरारका
वाणी मुरारका की काव्यालय पर रचनाएँ
अधूरी साधना
चुप सी लगी है
जल कर दे

वाणी मुरारका की आवाज़ में अन्य कवियों की रचनाएँ
आज नदी बिलकुल उदास थी - केदारनाथ अग्रवाल
तुम्हारे साथ रहकर - सर्वेश्वरदयाल सकसेना
यातनाएं - विस्सावा शिंबोर्स्का
ये गजरे तारों वाले - रामकुमार वर्मा
सुप्रभात - प्रभाकर शुक्ला
वाणी मुरारका, डॉ विनोद तिवारी के साथ काव्यालय की रचयिता और सह-सम्पादक हैं। उन्होंने एक मौलिक सॉफ़्टवेयर का भी निर्माण किया है - गीत गतिरूप, जो कवि को अपनी रचना का आकार परिष्कृत करने में सहायता करता है।

वाणी ने औपचारिक शिक्षा कम्प्यूटर विज्ञान में प्राप्त किया, और कई वर्षों तक सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम किया। वह चित्रकला और लिखना पसन्द करती हैं और इन दिनों उस आत्म-अभिव्यक्ति की तलाश में हैं जिससे भौतिक ज़रूरतें, आत्मसन्तोष और धर्म-पालन का एहसास - सभी प्राप्त हो।

कोलकाता निवासी वाणी, देश प्रान्त की परिभाषा और अहम के परे, चाहती हैं कि समस्त विश्व और ब्रह्माण्ड के प्रति निष्ठा महसूस करें। विल्यिम ब्लेक की इन पंक्तियों में उन्हें अपना जीवन-उद्देश्य प्रतिध्वनित होता लगता है -
To see the World in a grain of sand
And Heaven in a wild flower
Hold Infinity in the palm of your hand
And Eternity in an hour.

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