कर्म
कर्म दैविक सम्पदा का द्वार है;
विश्व के उत्कर्ष का आधार है।

कर्म पूजा, साधना का धाम है;
कर्मयोगी को कहाँ विश्राम है।

कर्म भावी योजना का न्यास है;
सत्य-चित-आनन्द का अभ्यास है।

कर्म जीवन का मधुरतम काव्य है;
कर्म से ही मुक्ति भी सम्भाव्य है।
- किरीटचन्द्र जोशी
Ref: Navneet Hindi Digest, May 1999
Poet's Address: B 12 Shivam Complex Lanka, Varanasi 221005

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इस महीने
'गा रही मैं गीत में तूफ़ान'
सूर्यकुमारी माहेश्वरी


गा रही मैं गीत में तूफ़ान!

आज जबकि सप्त सागर खौलते हैं
आज जबकि प्रलय के स्वर गूंजते हैं
आज घिरता आ रहा जब विश्व का अवसान
गा रही मैं गीत में तूफ़ान!
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इस महीने
'यह अमरता नापते पद - महादेवी वर्मा को श्रद्धांजलि'
शरद तिवारी



बात उन दिनों की है जब मैं क्रोस्थवेट कॉलेज, इलाहाबाद में ग्यारहवीं-बारहवीं कक्षा में पढ़ती थी। भारत की स्वतंत्रता को भी अभी 11 - 12 वर्ष ही हुए थे। उन दिनों इलाहाबाद हिन्दी साहित्य का गढ़ माना जाता था। हिन्दी के कई दिग्गज साहित्यकार इलाहाबाद के निवासी थे। इनमें से तीन प्रमुख नाम थे निराला, सुमित्रानंदन पंत, और महादेवी वर्मा, जिन्हे हिन्दी में छायावाद का अग्रदूत कहा जाता है। इन तीनो में मेरे लिए और मेरी सहपाठी सखियों के लिए महादेवी वर्मा का विशेष भावनात्मक महत्त्व था, क्योंकि वह भी हमारे क्रोस्थवेट कॉलेज में ही प्रशिक्षित हुयी थीं। ..
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शुक्रवार 7 सितम्बर को

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