गांव
एक अंधेरा, एक ख़ामोशी, और तनहाई,
रात के तीन पांव होते हैं।
ज़िन्दगी की सुबह के चेहरे पर,
रास्ते धूप छाँव होते हैं।

ज़िन्दगी के घने बियाबाँ में,
प्यार के कुछ पड़ाव होते हैं।
अजनबी शहरों में, अजनबी लोगों के बीच,
दोस्तों के भी गांव होते हैं।
- मधुप मोहता
Madhup Mohta
Email : madhupmohta@hotmail.com
Madhup Mohta
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मधुप मोहता
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'सत्ताईस फरवरी: शहीद का ब्याह'
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बड़े दिनों की लालसा, बड़े दिनों की चाह।
लिख पायेगी लेखनी, क्या शहीद का ब्याह ?
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स्वर्ग लोक में सभा सजी थी, सब थे पद आसीन
मृत्यु प्रफुल्लित खड़ी हुई थी, यम थे पीठासीन।
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सत्ताईस फरवरी तिथि निश्चित पूर्ण नहीं तैयारी। ...
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प्रदीप शुक्ला


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औरों की क्या कहूं, मैं अपनी बात बताता
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पूरी रचना यहाँ पढें...
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शुक्रवार 9 मार्च को

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