गांव
एक अंधेरा, एक ख़ामोशी, और तनहाई,
रात के तीन पांव होते हैं।
ज़िन्दगी की सुबह के चेहरे पर,
रास्ते धूप छाँव होते हैं।

ज़िन्दगी के घने बियाबाँ में,
प्यार के कुछ पड़ाव होते हैं।
अजनबी शहरों में, अजनबी लोगों के बीच,
दोस्तों के भी गांव होते हैं।
- मधुप मोहता
Madhup Mohta
Email : madhupmohta@hotmail.com
Madhup Mohta
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मधुप मोहता
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'समय की शिला पर'
शम्भुनाथ सिंह


समय की शिला पर मधुर चित्र कितने
किसी ने बनाये, किसी ने मिटाये।

किसी ने लिखी आँसुओं से कहानी
किसी ने पढ़ा किन्तु दो बूंद पानी
इसी में गये बीत दिन ज़िन्दगी के
गयी घुल जवानी, गयी मिट निशानी।

विकल सिन्धु के साध के मेघ कितने
धरा ने उठाये, गगन ने गिराये।
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शुक्रवार 22 दिसम्बर को

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